Sunday, June 9, 2019

संदीप सागर की कलम से शल्य कक्ष की याद

वक्त हुआ मैं भूल ना पाया याद मुझे है
शल्य कक्ष की टेबल का वह Seen मुझको|
दिला के करवट मोड़ा के घुटने झुका के गर्दन
लगा दिया इन Anawin  मुझको ||
तेरे छूने भर से बढ़ जाती है धड़कनें दिल की
फिर क्यों लगा दिया फिर Atropin  मुझको ||
 नशा तेरी आंखों में है जानती थी तू
 नजरे करम काफी था क्यों लगा दिया Pentazocin ने मुझको ||
 तुझ को देखने से बढ़ता है नसों में दबाव खून का
आखिर क्यों लगा दिया Mephentine मुझको ||
यह जानती थी तू मेरी इजहार से पिघल जाएगी
कर ना सकू इजहार तभी तो लगा दिया Ketamine मुझको ||
                                 ||  संदीप सागर की कलम से||
 उम्र भर यूं चले प्यार का सिलसिला
अलविदा बोल कर अब कहां तू चला
 मैं संभल जाऊंगा थोड़ी मोहलत दो दो
जख्म भरता नहीं प्यार में जो गला
                    Sagar Samrat